भगवान कहाँ पर है ?

ये प्रश्न कई बार कई लोगों के हृदय में उठता होगा। शास्त्रों में इस का उत्तर कई बार कई जगह पर दिया हुआ है। सर्वप्रथम सर्वमान्य भगवद् गीता के अध्याय ९ की श्लोक संख्या ४ में स्वयं कृष्ण कहते हैं : मया ततमिदं सर्वं जगदव्यक्तमूर्तिना। मत्स्थानि सर्वभूतानि न चाहं तेष्ववस्थित: ॥ इस […]
555 शब्दों के कृष्ण

पुराणों में वर्णित ५० करोड़ योजन में फैले हुए ज्योतिपुंज अपने धाम गोलोक से चल कर जब पृथ्वी का दुःख दूर करने के लिए साँवला रूप बनाकर, सिर पर मोरपंख लगाकर श्रीकृष्ण माता देवकी के गर्भ से जन्म लेकर नन्द गाँव में अपने मुँह में पूरे ब्रह्मांड को दिखाते हुए यशोदा जी की गोद में […]
गुरु, सखा और रक्षक

मुझे महाकवि जयशंकर प्रसाद जी की कविता “आँसू” का एक अंश याद आ रहा है: “जो घनीभूत पीड़ा थी, मस्तक में स्मृति सी छाई। दुर्दिन में आँसू बनकर, वह आज बरसने आई ।।” अब ध्यान लगाने पर मैं यहाँ होता ही नहीं हूँ। कहीं और चला जाता हूँ। कितना समय बीत जाता है […]
32 अपराधों का प्रायश्चित्त ( २ )

यस्य कस्यचिन्मासस्य शुक्लपक्षस्य द्वादशीम् । उपोष्य चाष्टभक्तं तु दशैकादशमेव च॥ ११॥ प्रभातायां तु शर्वर्यामुदिते च दिवाकरे । पञ्चगव्यं ततः पीत्वा शीघ्रं मुच्यति किल्बिषात् ॥ १०० ॥ आगे भगवान वराह कहते हैं- “हे वसुधे ! जो लोग बिना फूल माला और गन्ध के मेरा पूजन करते हैं वह मृत्यु उपरान्त राक्षस योनि को […]
प्रेम कहाँ से आया

श्रीकृष्ण के जीवन में श्रीराधा का क्या स्थान है ये वही जानते हैं जो श्रीराधा को जानते हैं, भजते हैं। शास्त्रों में श्रीराधा का नाम लेने के पश्चात ही कृष्ण कहने को कहा गया है। जो ऐसा नहीं करता तो वह पाप का भागीदार बनता है। ऐसा ब्रह्मवैवर्त पुराण के दूसरे भाग के कृष्णजन्म खण्ड के […]
महाभारत का सत्य

ब्रह्मन् वेदरहस्यं च यच्चान्यत् स्थापितं मया । साङ्गोपनिषदां चैव वेदानां विस्तरक्रिया ॥ ६२ ॥ महाभारत काव्य ग्रन्थ के बारे में लोगों में बहुत बड़ा मिथक है कि इस धर्मग्रन्थ को घर पर नहीं रखना चाहिए। ये किन्हीं का फैलाया हुआ झूठ है। सर्वप्रथम व्यासजी ने ध्यान-योग में स्थित होकर अपनी ज्ञानदृष्टि से […]
हमारा जन्म कैसे होता है ?

मानव के जन्म लेने की विधि शास्त्रो में क्या बताई गई है? महाभारत के प्रथम खण्ड के नवतितमोऽध्याय (९१) अध्याय में अष्टक के पूछने पर ययाति बताते हे कि अपने कर्मों के कारण से शरीर को पा कर, गर्भ से निकलने के पश्चात जीव सबके सामने प्रकट होता है। ये भौम नाम का नरक […]
गंगा पृथ्वी पर दो बार आई है

ब्रह्मपुराणम् के दो भाग हैं, एक का नाम पूर्वभागः और दूसरे का नाम उत्तरभागः है। पूर्वभागः के अध्याय संख्या ७२ ‘शिवविवाह’ के अंर्तगत कथा में गंगा की उत्पत्ति के बारे में बताया गया है। भगवान शिव और माता गौरी के विवाह के समय किन्हीं कारणवश ब्रह्माजी को पातित्य प्राप्त हो गया था। मंडप से ब्रह्माजी […]
सुदर्शन चक्र कहाँ से आया था

भगवान् श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र की प्राप्ति की कहानी हिन्दू पौराणिक कहानीओं में एक महत्वपूर्ण और रोचक प्रसंग है। इसकी प्राप्ति के बारे में विभिन्न पुराणों और ग्रंथों में कई कहानी मिलती हैं। सुदर्शन चक्र की उत्पत्ति और प्राप्ति के बारे में लोगों में बहुत गलत धारणा है कि सुदर्शन चक्र समुद्र मंथन के […]
हिरण्याक्ष, रावण और शिशुपाल एक ही थे

स्कन्दपुराण के कार्तिकमास माहात्म्य में बताया गया है कि महर्षि कर्दम की दृष्टि मात्र से तृणविन्दु की कन्या देवहूति के गर्भ से ‘जय’ और ‘विजय’ नाम के दो पुत्रों का जन्म हुआ। उन्होंने भगवान विष्णु की बहुत अनन्य भक्ति की। इस कारण से भगवान विष्णु ने उन्हें अपना द्वारपाल बना दिया। आगे चल कर स्कन्दपुराण के […]