भगवान का अणु रूप

बहुत से मानवों को एक संशय रहता है कि भगवान आखिर है कहाँ? विज्ञान इसे सिद्ध क्यों नहीं करता? ब्रह्मपुराणम् के प्रथमोऽध्यायः (१) के शुरू में ही एक श्लोक है: आधारभूतं विश्वस्याप्यणीयांसमणीयसाम्। प्रणम्य सर्व्वभूतस्थमच्युतं पुरुषोत्तमम्॥२५॥ ज्ञानस्वरूपमत्यन्तं निर्मलं परमार्थतः। तमेवार्थस्वरूपेण भ्रान्तिदर्शनतः स्थितम्॥२६॥ भगवान सम्पूर्ण विश्व का आधार है, जो सबसे […]
Atomic form of God

Many human beings have a doubt as to where is God. Why doesn’t science prove this? There is a verse in the beginning of Prathamodhyayah (1) of Brahmapuranam: आधारभूतं विश्वस्याप्यणीयांसमणीयसाम्। प्रणम्य सर्व्वभूतस्थमच्युतं पुरुषोत्तमम्॥२५॥ ज्ञानस्वरूपमत्यन्तं निर्मलं परमार्थतः। तमेवार्थस्वरूपेण भ्रान्तिदर्शनतः स्थितम्॥२६॥ God is the basis of the entire universe, who is subtler […]
खाटू श्याम बाबा का सत्य

स्कन्दपुराण के माहेशवरखण्ड-कुमारिकाखण्ड [2] के अध्याय ६० और ६६ में घटोत्कच विवाह और उनके पुत्र बर्बरीक के बारे में बहुत विस्तार से बताया गया है। बर्बरीक के बारे में किसी और पुराण या शास्त्र में कोई ज़िक्र नहीं है। शौनक ऋषि जी के पूछने पर उग्रश्रवा ( सूत् जी ) बताते हैं कि जब घटोत्कच अपनी […]
श्रीमद्भगवद्गीता के पहले अध्याय की व्याख्या

धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय॥ १॥ महाभारत के तृतीय खण्ड के भीष्मपर्व के पञ्चविंशोऽध्यायः से श्रीमद्भगवद्गीता का आरम्भ होता है। इस के प्रथम अध्याय का पहला श्लोक, जिसे जन्म से ही नेत्रहीन धृतराष्ट्र, अपने सलाहकार, मंत्री और सारथी संजय से पूछते हैं- व्याख्या: श्रीमन्महर्षि वेदव्यास जी ने बहुत सरल […]
महाभारत क्यों पढें

आम मानस के मन में एक बहुत बड़ी दुविधा रहती है कि महाभारत पढ़नी नहीं चाहिए या घर पर नहीं रखनी चाहिए। महाभारत के पहले अध्याय में एक श्लोक है: ब्रह्मन् वेदरहस्यं च यच्चान्यत् स्थापितं मया । साङ्गोपनिषदां चैव वेदानां विस्तरक्रिया ॥ ६२॥ जब व्यास जी ने अपनी दिव्य दृष्टि […]
मैं कौन हूँ

मैं एक लेखक हूँ मुझे आध्यात्मिकता पर लिखना बहुत अच्छा लगता है। ऐसा नहीं है कि मैं कोई इस का विश्लेषक हूँ, बल्कि ये इस लिए है कि जब भी आप आध्यात्मिकता पर सोचते हैं, पढ़ते हैं या लिखते हैं तो आपको आत्मिक सन्तोष मिलता है। आपकी आत्मा को जैसे भोजन मिल जाता है। वह […]
आत्मा करता है या करती है?

आत्मा करता है न कि करती है बहुत से मानव कहते हैं कि आत्मा करता है कहना सही नहीं है, करती है कहना सही है। जोकि उचित नहीं है। वेदों, शास्त्रों, उपनिषदों में आत्मा को पुल्लिंग ही बताया गया है। संस्कृत भाषा में भी आत्मा को पुल्लिंग ही बताया गया है। सबसे पहले हम वेदों […]
प्राणायाम का महत्व – श्रीकृष्ण मुख से

अपाने जुह्वति प्राणं प्राणेऽपानं तथापरे।प्राणापानगती रुद्ध्वा प्राणायामपरायणाः॥ २९ ॥ यह श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय चार का संख्या 29 श्लोक है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को प्राणायाम के बारे में बता रहे हैं। साधना के लिए यज्ञ के जो चार प्रकार ऊपर, श्लोक संख्या 28 में बताएँ हैं उनमें तीसरे योग यज्ञ में प्राणायाम का […]