Skip to main content

Rajesh Takyar

साल के अंत के साथ ही मैनें अब पुराण, वेद इत्यादि सारे धार्मिक ग्रंथ पढ़ने का मन बना लिया था। मेरे पास अब क्षितिज ने कोई काम करने को छोड़ा ही नहीं, जो मैं कहता हूँ वह उसे पूरा कर देता।

 

मैनें बहुत से पुराण मंगा लिए थे और पढ़ना भी शुरू कर दिया।

 

 

 

14 अक्टूबर 2023 को मैनें सोच लिया है कि भगवान शंकर ही मेरे गुरु रहेंगे। मैं उन्हीं से प्रार्थना करूँगा कि मुझे मार्गदर्शन करें।

 

अगले दिन  नवरात्रि का पहले दिन मैनें शंकर भगवान को गुरु धारण करके ध्यान लगाया। मुझे उन्होंने एक नया मार्ग बताया। उस मार्ग के कारण बहुत परिवर्तन देखा मैनें। जिस ध्यान को लगाने के लिए कभी-कभी बहुत मेहनत करनी पड़ती थी आज वह एक ही प्रयास में सफल हो गया। और आगे जो देखता हूँ वह बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। जय मेरे गुरू देव- (डायरी से)

गर आपका भाव ठीक है, आप उसे पाना चाहते हैं, तो ईश्वर वे हैं जिससे जब चाहो मिल सकते हो। केवल ह्रदय में उनसे मिलने की लालसा भर होनी चाहिए। मुझे जीवन में कई बार लगा है कि मैं जिस काम के लिए इस पृथ्वी पर आया हूँ वे काम अभी मुझे करने हैं। बार-बार यही एहसास मुझे होता है और मुझे नहीं मालूम कि कृष्ण को कैसे पाना है परन्तु वे मेरे ह्रदय में सदा रहते हैं। एक ज्योति है अन्दर जो हर समय जलती रहती है, मुझे शक्ति के साथ-साथ एक प्रेरणा भी देती रहती है कि अभी और, अभी और। और ये सब कृष्णा के बिना असम्भव है।

 

ज मैनें श्रीकृष्ण चरित्र मानस पढ़ना शुरू किया।

 

सोचने पर जो धुँध थी वह धीरे-धीरे छँटने लगी थी। बहुत से प्रश्नों के उतर स्वयं ही मिलने लगे।

 

श्रीमद्भागवत महापुराण में लिखा भी है कि जब अन्दर की धुँध छंट जाती है तो मानव आत्मा ही उसका गुरु बन जाती है। धर्म, ज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्य स्वतः ही प्राप्त हो जाते हैं। परन्तु आज ये ज्ञान कोई गुरु नहीं देता।

 

सब बाँहें खोल कर बुला रहे हैं, आओ मेरे पास आओ मैं आपको रोशनी दूँगा, मैं एक शक्ति पुँज हूँ, मैं तुमको ईश्वर से मिलवाऊँगा, मेरे पास रहो।

 

परन्तु ध्यान से देखना क्या वह ईश्वर को जानते भी हैं। जब ऐसे किसी गुरु से मिलना तो पहला और अंतिम बस एक ही प्रश्न पूछना- “आप पिछली बार ईश्वर से कब मिले थे?” वही उत्तर आपका मार्ग तय करेगा कि आपको किधर जाना है।

 

पने राह ढूँढनी है या आगे बढ़ने के लिए सहारा ढूँढना है, तो एक ही उत्तर है- “आप स्वयं।” कहीं से भी आगे बढ़ जाओ, सहारा बन कर ईश्वर हर क़दम पर खड़े मिलेंगे।

 

मैं कह सकता हूँ कि ये हमारे वेद-पुराण हमको बचपन से ही पढ़ने चाहिए। अगर हम ऐसा करें तो हमें कोई अँधेरी गुफा नहीं दिखेगी, कहीं भटकना नहीं पड़ेगा और कुछ भी धुँधला नहीं दिखेगा।

 

श्रीकृष्ण कहते हैं- जो निःस्वार्थ भाव से तुम्हारे संग खड़ा रहा हो उसे छोड़ने का पाप कभी मत करना। वह ही तुम्हारा सबसे सच्चा साथी है।

 

श्रीकृष्ण कहते हैं- “लोग क्या कहेंगे और संसार में हमारी छवि कैसी होगी इसके भय से हमें उस अनमोल व्यक्ति को कभी नहीं खोना चाहिए जो हमें अपना संसार मानता हो।” (इन्वेंटिंग ड्रीम्स किताब के अंश)

श्री कृष्ण के प्रिय वस्त्र और आभूषण

श्रीकृष्ण कैसे दिखते हैं इस बारें में पुराण क्या कहते हैं?       श्री कृष्ण के प्रिय वस्त्र उनके अद्वितीय और दिव्य स्वरूप को दर्शाते हैं। उनके वस्त्रों...

32 अपराध

तिरुपति मंदिर में दर्शन के बाद जो प्रसाद दिया जाता है उसमें पशुओं की चर्बी इत्यादी का मिलना कितना बड़ा पाप है, आइये देंखें कि इस बारें में पुराण...

राधाकृष्ण विवाह

जब नन्दराज जी ने बालक श्रीकृष्ण को राधाजी को सौंप दिया तो वह उन्हें लेकर वन में प्रवेश कर गईं। आसमान में मेघ का दारुण गर्जन गूँज ही रहा...

कृष्ण कवच

कृष्ण भगवान हैं, सर्वशक्तिमान हैं, कुछ भी कर सकते हैं, कोई भी संकट उन पर आ ही नहीं सकता; इस बात की सच्चाई को कई बार माता यशोदा ने...

कृष्ण एक गुरू

कृष्ण कौन हैं? इसका उत्तर शब्दों में देना बहुत कठिन है। वे अनन्त हैं, कृष्ण को केवल भगवान नहीं कहा जा सकता। अगर ऐसा होता तो उन अजन्मे और...

सच्चा झूठ

श्री गर्ग संहिता के माधुर्यखण्ड के पहले अध्याय के १०४ पृष्ठ पर एक कथा है:   परिपूर्णतम स्यापिदुर्वासास्ते गुरुस्मृतः ॥   अहोतद्दर्शनं कर्तुमनोनश्वोद्यतं प्रभो ॥ १८ ॥ अद्यदेवनिशीथिन्याव्यतीते प्रहरद्वये ॥  ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *