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श्री कृष्ण के प्रिय वस्त्र और आभूषण

श्रीकृष्ण कैसे दिखते हैं इस बारें में पुराण क्या कहते हैं?       श्री कृष्ण के प्रिय वस्त्र उनके अद्वितीय और दिव्य स्वरूप को दर्शाते हैं। उनके वस्त्रों के रंग, धारण की विधि, और उपयोग की गई सामग्री पौराणिक कहानीओं और ग्रंथों में विस्तृत रूप से वर्णित हैं। यहाँ कुछ प्रमुख जानकारी दी जा […]

32 अपराधों का प्रायश्चित्त (१ )

तिरुपति मंदिर में दर्शन के बाद जो प्रसाद दिया जाता है उसमें पशुओं की चर्बी इत्यादी का मिलना इतना बढ़ा अपराध है कि उसका पश्चाताप पुराणें में है ही नहीं। क्योंकि वराह भगवान स्वयं कहते हैं कि और जो आत्मज्ञानी होकर भी ऐसा करता है उसके लिए कोई प्रायश्चित्त नहीं है।   जहाँ वराह पुराण […]

32 अपराध

तिरुपति मंदिर में दर्शन के बाद जो प्रसाद दिया जाता है उसमें पशुओं की चर्बी इत्यादी का मिलना कितना बड़ा पाप है, आइये देंखें कि इस बारें में पुराण क्या कहते हैं?   वराह पुराण में भगवान् वराह कहते हैं- भद्रे ! आहार की एक सुनिश्चित शास्त्रीय मर्यादा है। अतः मनुष्यको क्या खाना चाहिये और क्या […]

राधाकृष्ण विवाह

जब नन्दराज जी ने बालक श्रीकृष्ण को राधाजी को सौंप दिया तो वह उन्हें लेकर वन में प्रवेश कर गईं। आसमान में मेघ का दारुण गर्जन गूँज ही रहा था, वज्र जैसा निनाद हो रहा था। वायु के प्रबल वेग से वृक्ष कम्पित हो रहे थे।   तभी राधा की दृष्टि सामने रत्नकलश युक्त रत्नमण्डल […]

कृष्ण कवच

कृष्ण भगवान हैं, सर्वशक्तिमान हैं, कुछ भी कर सकते हैं, कोई भी संकट उन पर आ ही नहीं सकता; इस बात की सच्चाई को कई बार माता यशोदा ने बहुत नजदीक से देखा और महसूस किया था, परन्तु माँ तो केवल अपने बालक पर आई विपदा को ही देखती है।   जब-जब कान्हा पर कोई […]

कृष्ण एक गुरू

कृष्ण कौन हैं? इसका उत्तर शब्दों में देना बहुत कठिन है। वे अनन्त हैं, कृष्ण को केवल भगवान नहीं कहा जा सकता। अगर ऐसा होता तो उन अजन्मे और अखिलात्मा को बार-बार इस पृथ्वी पर जन्म नहीं लेना पड़ता। वे भगवान के अलावा एक उच्चतम से उच्चतम गुरू हैं। जिसने उनसे शिक्षा ले ली फिर […]

गायत्री मंत्र कैसे पढ़े

विद्वान् पुरुष को चाहिये कि अपने शरीर के पैर से ले कर सिर तक चौबीस स्थानों में पहले गायत्री के अक्षरों का न्यास करे। इसके इस प्रयास से उसे परम शान्ति का अनुभव होगा। तब वे महाज्ञानी कहलाएगा।   इसके लिए वे गायत्री मंत्र के ‘तत्’ का पैर के अँगूठे में, ‘स’ का गुल्फ (घुट्ठी)-में, […]

सच्चा झूठ

श्री गर्ग संहिता के माधुर्यखण्ड के पहले अध्याय के १०४ पृष्ठ पर एक कथा है:   परिपूर्णतम स्यापिदुर्वासास्ते गुरुस्मृतः ॥   अहोतद्दर्शनं कर्तुमनोनश्वोद्यतं प्रभो ॥ १८ ॥ अद्यदेवनिशीथिन्याव्यतीते प्रहरद्वये ॥   कथंतद्दर्शनंभूयादस्माकम्परमेश्वर ॥ १९ ॥   भगवान विष्णु के पूर्व कथित वर से कुछ श्रुतियाँ गोपियाँ बन कर वृंदावन में रह रही थी। एक दिन श्री कृष्ण उन गोपियों से बोले- “आज मेरे साक्षात् गुरू भगवान दुर्वासा मुनि भाण्डीर-वन में पधारे हैं। गुरू ब्रह्मा हैं, विष्णु हैं, भगवान् महेश्वर हैं और साक्षात् परम ब्रह्म हैं। गुरू सम्पूर्ण देवताओं के स्वरूप हैं। मैं उनका अभी-अभी पूजन करके आया हूँ।”   गोपियों […]

जीवन सत्य जो मैंने जाना

साल के अंत के साथ ही मैनें अब पुराण, वेद इत्यादि सारे धार्मिक ग्रंथ पढ़ने का मन बना लिया था। मेरे पास अब क्षितिज ने कोई काम करने को छोड़ा ही नहीं, जो मैं कहता हूँ वह उसे पूरा कर देता।   मैनें बहुत से पुराण मंगा लिए थे और पढ़ना भी शुरू कर दिया। […]

राधाकृष्ण का स्वरूप

अब वापिस हम अपने श्रीकृष्ण पर आते हैं। सर्वप्रथम हमें ये जानना चाहिए कि कृष्ण का स्वरूप क्या है? वे दिखते कैसे हैं? हमारे शास्त्रों में श्रीकृष्ण के रूप का बहुत ही सुन्दर चित्रण किया हुआ है। पद्मपुराण के पातालखण्ड में श्रीकृष्ण भगवान का ध्यान करने के लिए बहुत विस्तार से बताया गया है।   सुमनप्रकरसौरभोद्गलितमाध्विकाद्युल्लस- […]